पड़ताल: गाय और तेंदुए के अनोखे लगाव की तस्वीरें, जिन्हें भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है– The Lallantop


दावा 

गाय और तेंदुए की दोस्ती की कुछ तस्वीरें वॉट्सऐप पर वायरल हो रही हैं. इन तस्वीरों को असम का बताया जा रहा है. साथ में एक इमोशनल स्टोरी भी शेयर हो रही है.

वायरल कहानी अंग्रेज़ी में है. हम आपको उसका हिंदी अनुवाद पढ़वा रहे हैं-

ये असम में कहीं पर हुआ है. एक आदमी ने इस गाय को खरीदकर गोशाला में रख दिया. रात में कुत्ते भौंकते थे, तो लोगों को लगता था कि चोर लॉकडाउन का फायदा उठा रहे हैं. गांववालों ने सीसीटीवी लगवाया और फिर जो दिखा, उसने सबको चकित कर दिया. वो लोग उस आदमी के पास पहुंचे, जिससे उन्होंने गाय खरीदी थी. पता चला कि ये चीता जब 20 दिनों का था, तभी इसकी मां की मौत हो गई थी. वो लोग चीते का बच्चा लेकर आए और इस गाय ने उसे अपना दूध पिलाया. जब बच्चा बड़ा हुआ, वो लोग उसे जंगल में छोड़ आए. लेकिन चीता अपने रक्षक को नहीं भूला. वो रोज़ाना रात में अपनी मां से मिलने आता है, जिसने उसकी जान बचाई.

वायरल हो रही तस्वीरें.

वॉट्सऐप पर वायरल हो रही तस्वीरें और साथ में शेयर की जा रही कहानी.
वॉट्सऐप पर वायरल हो रही तस्वीरें और साथ में शेयर की जा रही कहानी.

ये तस्वीरें फ़ेसबुक (आर्काइव लिंक) पर भी इसी दावे के साथ वायरल हो रही हैं.

👆Got the photo and story from my friend. Its somewhere in Assam. A man bought this cow and kept it in his cowherd. The…

Posted by PK Pal on Thursday, 14 May 2020

पड़ताल

‘दी लल्लनटॉप’ ने तस्वीरों और वायरल दावे की पड़ताल की. हमारी पड़ताल में पता चला कि तस्वीरें तकरीबन दो दशक पुरानी हैं. 

कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें ‘Onforest.com’ की 6 अप्रैल, 2014 को पब्लिश की गई एक रिपोर्ट (आर्काइव लिंक) मिली. रिपोर्ट का टाइटल है,

Stranger than Fiction-A Leopard and motherly Cow

कल्पना से परे एक किस्सा – एक तेंदुआ और मां-सदृश गाय

गाय और तेंदुए की प्रेम कहानी के पीछे का किस्सा.
गाय और तेंदुए के आपसी लगाव के पीछे का किस्सा उस वक्त कई जगह छपा था.

इस रिपोर्ट को पढ़ने पर पता चला कि ये कहानी जून, 2002 में शुरू हुई थी. गुजरात के वडोदरा में एक गांव है अंतोली. जम्बूघोडा अभ्यारण्य से तकरीबन 20 किलोमीटर की दूरी पर. अंतोली गांव के लोगों ने फ़ॉरेस्ट ऑफ़िसरों तक शिकायत पहुंचाई कि तेंदुए के एक मादा बच्चे को गांव में देखा गया है. पहले तो अधिकारियों ने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब चर्चा तेज़ हुई, तो तेंदुए को पकड़ने के लिए एक टीम भेजी गई. सितंबर, 2002 में तेंदुए को पकड़कर जंगल में छोड़ दिया गया.

लेकिन एक महीने बाद शिकायतें फिर से आने लगी. जब टीम दोबारा गांव में पहुंची, तो तेंदुए और गाय की दोस्ती देखकर दंग रह गई. तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया, पिंजरा में मांस के टुकड़े रखे गए. लेकिन मादा तेंदुआ गाय से मिलकर वापस चली जाती थी. तब वन अधिकारियों ने बेहोश करने वाली गोली के इस्तेमाल से तेंदुए को पकड़ने का फ़ैसला किया. लेकिन उससे पहले ही तेंदुए ने गांव में आना छोड़ दिया.

तेंदुए और गाय की दोस्ती की कोई ठोस वजह कभी मालूम नहीं हुई. जानकारों ने इस अनोखे रिश्ते पर कई कयास लगाए. एक कयास ये भी था तेंदुए को जंगल में अकेलापन लगता था, इसलिए वो रात में समय बिताने गाय के पास आ जाती थी.

तेंदुए और गाय के इस अनोखे रिश्ते की वजह को लेकर कई कयास लगाए गए.
तेंदुए और गाय के इस अनोखे रिश्ते की वजह को लेकर कई कयास लगाए गए.

इस रिपोर्ट में आपको वो तस्वीरें मिल जाएंगी, जो अभी असम की बताकर वायरल हो रही हैं.

इस रिपोर्ट में वडोदरा के पर्यावरणविद मनोज ठाकेर का ज़िक्र भी आया है. वो पहले फ़ोटोग्राफ़र थे, जिन्होंने तेंदुए और गाय की अनोखी दोस्ती को अपने कैमरे में कैद किया था. कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें “Mammals in Gujarat” नाम की एक किताब का पता मिला. ये किताब भारतीय वन्य सेवा के पूर्व अधिकारी डॉ. एच. एस. सिंह ने लिखी है. इसके ‘पेज नंबर 84’ पर ‘Love Story of leopard and cow’ टाइटल से एक रिपोर्ट मिली. हमें इसमें भी वो तस्वीरें दिख गईं, जो अभी अलग दावे के साथ वायरल हो रही हैं. 

हमने और सर्च किया, तो हमें एक यूट्यूब वीडियो मिला. ‘ज़ी न्यूज़’ की ये वीडियो रिपोर्ट ‘buykut’ नामक यूट्यूब चैनल ने 26 सितंबर, 2008 को अपलोड की थी. यूनुस सईद की इस रिपोर्ट में आपको गाय और तेंदुए के मिलने का वीडियो देख सकते हैं. ज़रूरी हिस्सा 1:58 मिनट के मार्क से शुरू होता है.

25 अक्टूबर, 2002 की टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट (आर्काइव लिंक) में भी इस अनोखी घटना की पुष्टि की गई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक़, तेंदुए की उम्र एक साल थी और गाय की उम्र तीन साल की थी.

Toi Report Cow And Leopard
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की अक्टूबर, 2002 की रिपोर्ट.

नतीजा

हमारी पड़ताल में स्पष्ट हुआ कि,

ये तस्वीरें असम की नहीं, बल्कि गुजरात के वडोदरा जिले के अंतोली गांव की हैं.

जिसे चीता बताकर प्रचारित किया जा रहा है, वो असल में मादा तेंदुआ थी.

ये घटना 2002 के साल की है. इसका कोरोना लॉकडाउन से कोई संंबंध नहीं है.

जहां तक इमोशनल कहानी का ज़िक्र है, किसी भी प्रामाणिक रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं हुई. जानकारों ने कयास लगाया कि अकेलेपन को मात देने के लिए मादा तेंदुआ जंगल छोड़कर गांव में आती थी.

अगर आपको भी किसी ख़बर पर शक है
तो हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com पर.
हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.

कोरोना वायरस से जुड़ी हर बड़ी वायरल जानकारी की पड़ताल हम कर रहे हैं.
इस लिंक पर क्लिक करके जानिए वायरल दावों की सच्चाई.





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Image courtesy



via farzi khabarhttps://farzikhabar.in/%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a8/

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